रायपुर { वफादार साथी } | भारत सरकार का ज्ञापन (Office Memorandum - OM) संख्या 1/7/2009-IR (या संभवतः 1/7/2009-Estt.(B) जैसा कोई समान) कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय (DoPT) द्वारा जारी किया गया था। यह गोवा राज्य सूचना आयोग (Goa State Information Commission) से संबंधित है और बंबई उच्च न्यायालय (गोवा खंडपीठ) के र
िट याचिका संख्या 419 ऑफ 2007 में दिए गए आदेश दिनांक 3 अप्रैल 2008 पर आधारित है।
मुख्य संदर्भ और विवरण
उच्च न्यायालय का आदेश (3 अप्रैल 2008): यह मामला Dr. Celsa Pinto, Ex-Officio Joint Secretary (School Education) बनाम Goa State Information Commission से संबंधित है। उच्च न्यायालय ने गोवा राज्य सूचना आयोग के कुछ निर्देशों/कार्यों पर टिप्पणी की थी, विशेष रूप से RTI आवेदनों के संदर्भ में जांच या पूछताछ के दायरे पर। अदालत ने स्पष्ट किया कि सूचना आयोग के पास RTI आवेदन के तहत जानकारी प्रदान करने के निर्देश देने का अधिकार है, लेकिन कुछ मामलों में विस्तृत जांच या रिपोर्ट मांगने का दायरा सीमित हो सकता है। यह निर्णय कई RTI मामलों में उद्धृत किया जाता है, खासकर जहां आयोग द्वारा अतिरिक्त जांच के निर्देश दिए जाते हैं।
(उद्धरण: 2008 (110) Bom L R 1238)
DoPT का ज्ञापन (OM) संख्या 1/7/2009-IR: यह OM दिनांक जून 2009 (संभवतः 1.6.2009) के आसपास जारी किया गया था। इसमें उच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेश (3.4.2008) का हवाला देते हुए राज्य सूचना आयोगों (विशेषकर गोवा के संदर्भ में) को दिशानिर्देश दिए गए थे।
इसका उद्देश्य RTI अधिनियम के तहत आयोगों की शक्तियों की सीमाओं को स्पष्ट करना था, ताकि आयोग केवल उपलब्ध जानकारी प्रदान करने या अपील निपटाने तक सीमित रहें, न कि अनावश्यक रूप से विस्तृत जांच या नई रिपोर्ट मांगें (जब तक RTI अधिनियम की धारा 18/19 के तहत स्पष्ट प्रावधान न हो)।
यह OM विभिन्न सरकारी विभागों/RTI संबंधित दस्तावेजों में संदर्भित है (जैसे CGDA, अन्य विभागों के RTI पोर्टल पर) और राज्य सूचना आयोगों को उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करने के लिए निर्देशित करता है।
महत्वपूर्ण बिंदु
यह निर्णय/OM RTI एक्ट के तहत PIO (सार्वजनिक सूचना अधिकारी) द्वारा जानकारी देने, अपील निपटाने और आयोग की भूमिका को प्रभावित करता है।
यदि आपके पास RTI आवेदन या अपील से संबंधित कोई विशिष्ट मुद्दा है, तो इस OM/आदेश का उपयोग PIO या आयोग को दिशानिर्देश के रूप में किया जा सकता है।
लेखक -अनिल कुमार अग्रवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़
