रायपुर { वफादार साथी}| छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव पर तानाशाही रवैया अपनाने के गंभीर आरोप लगाये हैं। संघ का कहना है कि वनक्षेत्रपाल के 05 प्रतिशत पदों को विज्ञान स्नातक कर्मचारियों से विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरने संबंधी सेवा भ
र्ती नियम में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जो स्वीकृत पदों और वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के साथ अन्याय है।संघ ने आरोप लगाया कि विभाग में सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारियों को संविदा भर्ती के माध्यम से पदस्थ किया जा रहा है जिसका संघ द्वारा लगातार विरोध किया जाता रहा है। इसके बावजूद प्रधान मुख्य वनसंरक्षक द्वारा अपने चहेते सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा नियुक्ति देकर शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
इससे विभागीय कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है और संविदा अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालकर कार्य कराया जा रहा है।संघ के प्रांताध्यक्ष अजीत दुबे ने बताया कि विभाग में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जैसे वाहन चालक एवं प्यून/चौकीदार जिन्हें नियमों के अनुसार वर्दी धारण करने की पात्रता नहीं है।
उनसे भी निर्धारित वर्दी पहनाकर कार्य कराया जा रहा है जो शासन के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें किये जाने के बावजूद अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसके विपरीत कर्मचारियों के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई जा रही है।संघ ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद जिनमें वर्दीधारी बल के स्थानांतरण और पदस्थापना पर रोक है प्रधान मुख्य वनसंरक्षक द्वारा नियमों को ताक पर रखकर कार्यआवंटन के नाम पर स्थानांतरण, पदस्थापना एवं संलग्नीकरण किये जा रहे हैं।
क्षेत्रीय अधिकारियों मुख्य वनसंरक्षक एवं वनमंडलाधिकारी को मौखिक एवं लिखित निर्देश देकर वरिष्ठ अधिकारियों को हटाकर कनिष्ठ कर्मचारियों को प्रभार सौंपने का दबाव बनाया जा रहा है जो पूरी तरह नियमविरुद्ध है।संघ का कहना है कि इन कार्यवाहियों से पूरे प्रदेश में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भय के वातावरण में कार्य करने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं वन बल प्रमुख के तानाशाही रवैये का कड़ा विरोध करते हुए घोषणा की है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री और वन मंत्री को शीघ्र ज्ञापन सौंपा जायेगा।
