रायपुर { वफादार साथी }|लोक निर्माण विभाग, विधानसभा संभाग, रायपुर ने आखिरकार दिया जानकारी, हालांकि पेनाल्टी के लिए द्वितीय अपील किया जायेगा, रायपुर में लंबे समय तक एस डी ओ से कार्यपालन अभियंता विशाल त्रिवेदी एक ही व्यक्ति नहीं हैं, हम एक सूची जारी कर रहे हैं जो लोक निर्माण विभाग संभाग विधानसभा से संबंधित हैं, जिसे प्रथ
म अपील डी के नेताम के आदेश के बाद दिया गया है जिसे जनहित में जारी कर रहे हैं ये भी आधी अधूरी जानकारी है।
जब ठेकेदारों से तरह तरह की व्यक्तिगत जानकारी मांगते हैं तो मज़ा आता हैं अब जब इनका जानकारी सार्वजनिक कर रहा हूं तो इन्हे पता चलेगा, ठेकेदारों का दर्द, किसी समय तो मैं इनको देखकर मुस्कुराह देता था अब तो इनको देखकर मुंह मोड़ देता हूं क्योंकि ये लोग दबी जुबान हमारे बारे में नकारात्मक टिप्पणी करते हैं।
उक्त सूची का एक एक अध्ययन करेंगे ।
कंडिका नंबर 5 में श्री टी एस ध्रुव ये दिनांक 14/10/2001 से पदस्थ हैं।
कंडिका नंबर 8 में श्रीमती रीता धारीवाल उप अभियंता तिल्दा उप संभाग ये दिनांक 29/2/2008 से पदस्थ हैं।
कंडिका नंबर 9 में श्री सुरेश कुमार मढ़रिया उप अभियंता तिल्दा उप संभाग ये दिनांक 14/10/2008 से पदस्थ हैं।
इसी प्रकार संजय कापसे, हेमंत कुमार साहू, महेश लहरें, एन एस वर्मा, श्रीमति सोनल शर्मा ये पूर्व में अन्य संभाग में थी, श्रीमति नेहा निगम, अश्वनी वर्मा, धीरेन्द्र कुमार वर्मा, उत्तम कुमार वर्मा, श्रीमती भावना उपाध्याय इस तरह अनेक उप अभियंता हैं जो एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, इन्हें हम गंगाजल से धुले मानते हैं, क्योंकि इनके यहां पर E D और आयकर विभाग का छापा नहीं पड़ा है।
छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवकों के स्थानांतरण (Transfer) से संबंधित नियम और “3 वर्ष से अधिक एक स्थान पर नहीं रखने” का सिद्धांत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), रायपुर की ट्रांसफर नीति (Transfer Policy) से आता है। यह नियम हर साल जारी/संशोधित नीति में शामिल रहता है।
मैं आपको इसे सरल और विस्तार से समझाता हूँ
1. मूल सिद्धांत (3 वर्ष का नियम क्या है?)
छत्तीसगढ़ शासन की ट्रांसफर नीति के अनुसार:
सामान्यतः किसी भी शासकीय सेवक को
एक ही स्थान/पद पर 3 वर्ष से अधिक नहीं रखा जाना चाहिए
इसका मतलब:
3 वर्ष पूरा होने पर कर्मचारी स्थानांतरण हेतु पात्र (due for transfer) माना जाता है
प्रशासन को ऐसे कर्मचारियों का रोटेशन (rotation) करना चाहिए।
2. यह नियम क्यों बनाया गया?
इस नियम के पीछे मुख्य उद्देश्य:
प्रशासन में पारदर्शिता (Transparency)
भ्रष्टाचार की संभावना कम करना
स्थानीय प्रभाव (influence) को रोकना
सभी कर्मचारियों को समान अवसर देना।
3. वर्तमान ट्रांसफर नीति (उदाहरण 2025)
हाल की नीति में भी कुछ प्रमुख बातें बताई गई हैं:
कम से कम 2 वर्ष की न्यूनतम अवधि पूरी किए बिना सामान्यतः ट्रांसफर नहीं
The Times of India
लेकिन 3 वर्ष के बाद कर्मचारी स्थानांतरण के लिए प्राथमिक सूची में आता है
ट्रांसफर प्रक्रिया को नियंत्रित और सीमित प्रतिशत में किया जाता है ।
विशाल जनहित में हम कुछ ज्ञान की बात प्रकाशित कर रहे हैं।
यदि कोई शासकीय सेवक (सरकारी कर्मचारी) अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक यानी अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) रखता हुआ पाया जाता है, तो यह एक गंभीर अपराध माना जाता है। भारत में इस पर कार्रवाई मुख्य रूप से Prevention of Corruption Act, 1988 के तहत की जाती है।
क्या दंड मिल सकता है?
1. आपराधिक सजा (Criminal Punishment)
दोष सिद्ध होने पर कम से कम 4 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है
साथ ही जुर्माना (Fine) भी लगाया जाता है।
2. संपत्ति की जब्ती (Property Confiscation)
जो संपत्ति आय के स्रोत से अधिक पाई जाती है, उसे सरकार द्वारा जब्त (seize) किया जा सकता है।
3. नौकरी से संबंधित कार्रवाई (Departmental Action)
सेवा से निलंबन (Suspension)
बर्खास्तगी (Dismissal)
पेंशन या अन्य लाभों पर रोक
4. जांच एजेंसी द्वारा कार्रवाई
इस तरह के मामलों की जांच आमतौर पर Central Bureau of Investigation (CBI) या राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो करती है।
महत्वपूर्ण बात
कानून के अनुसार, यदि किसी सरकारी कर्मचारी की संपत्ति उसकी ज्ञात आय से अधिक पाई जाती है, तो उस पर यह साबित करने की जिम्मेदारी होती है कि वह संपत्ति वैध तरीके से अर्जित की गई है।
