बिलासपुर { वफादार साथी }| जल संसाधन विभाग संभाग विद्युत यांत्रिकी भारी संयंत्र संभाग बिलासपुर जो कि सकरी में लगते हैं इनके कार्यपालन अभियंता मनीष शर्मा हैं, मनीष शर्मा की काबिलियत का उपयोग जल संसाधन संभाग खारंग, कोटा, मुंगेली या नगर निगम या अन्य विभाग में विलय कर किया जा सकता है।
इस तरह के अ
नेक अनावश्यक शासकीय कार्यालय को बंद, नगर निगम में विलय कर देना चाहिए, जल संसाधन का जल संसाधन विभाग संभाग विद्युत यांत्रिकी भारी संयंत्र संभाग - बिलासपुर जो कि बिलासपुर के सकरी में संभाग कार्यालय हैं इनको बंद कर जल संसाधन विभाग खारंग, कोटा, मुंगेली या अन्य जल संसाधन विभाग संभाग में विलय देना चाहिए।
जब कोई वित्तीय स्वीकृति नहीं है तो
1.श्रीमती कुष्मांडा पाटले
2.अंबिकेश साव
3.श्रीमती मेघा वर्मा
4.कु संगीता गौरहा
5.अमन खरे
को उपसंभाग सकरी में पदस्थ करने की क्या आवश्यकता है। इन 5 उपअभियंता का वेतन भत्ता, पेंशन एवं अन्य सुविधा की गणना करे तो 5 लाख रुपए प्रति माह होगी जो कि निरर्थक व्यय है छत्तीसगढ़ शासन के ऊपर इन 5 लोगों से जल संसाधन उप संभाग खारंग का कार्य लिया जाय अन्यथा इन्हें नगर निगम, बिलासपुर में विलय कर देना चाहिए।
इसी प्रकार
6.कु रीमा कुजूर
7.सौरभ विश्वकर्मा
8.श्रीमती रश्मि भारद्वाज बंजारे
9.लक्ष्मी नारायण राज
10.कुमारी अनीता एक्का
11.राकेश तिग्गा
12.श्रीमती सोनम सिंह
13.श्री शशि करण मांडवी
14.विट्ठल गगरानी
15.जय कुमार देवांगन ये सभी उप अभियंता हैं इसके अतिरिक्त 10 स्टाफ अलग हैं जब कोई वित्तीय स्वीकृति नहीं है तो फिर इनको पालने का क्या मतलब है छत्तीसगढ़ शासन पर जल संसाधन विभाग संभाग - विद्युत यांत्रिकी भारी संयंत्र संभाग, बिलासपुर का वित्तीय भार कम से कम 15 लाख रुपए महीना हो रहा होगा जो निरर्थक व्यय है।
इसीलिए जल संसाधन विभाग संभाग विद्युत यांत्रिकी भारी संयंत्र संभाग बिलासपुर को जल संसाधन के अन्य उप संभाग में विलय कर देना चाहिए या नगर निगम, नगर पंचायत, महिला एवं बाल विकास में विलय कर दे जिससे कि इनसे कार्य लिया जाए मुफ्त में वेतनखोर नहीं बनाना जाना चाहिए।
लेखक - अनिल कुमार अग्रवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़
