एक समय था, जब दूध को अमृत समझा जाता था। अब तो दूध पीने के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी पड़ती है। दूध का स्थान अब चाय ने ले लिया है। जगह-जगह आपको मनभावन अमृततुल्य चाय के बोर्ड लगे नजर आ जाएंगे। दूध के बोर्ड भला कहीं दिखे आपको ? चाय वो भी अमृतुल्य, देवता भी चकरा रहे होंगे। सागर-मंथन में सब कुछ निकला मगर चाय नहीं निकली हम चूक गए
। अब चाय के बोर्ड देख जी ललचा रहा है। अब तो भक्तगण उपवास में भी चाय गटक लेते हैं। मानो देवताओं ने फोन पर बताया हो, चाय पी सकते हो। चाय के कितने प्रकार हो सकते हैं? मुझे दो ही प्रकार ज्ञात हैं। लाल चाय और दूध वाली चाय। मगर अमृततुल्य चाय के अनेकों रूप देखकर मैं चकित हूँ। चाय तुम धन्य हो, तुमने आम आदमी से ख़ास आदमी तक का सफ़र कितनी आसानी से तय कर लिया। बहुत बेकार आदमी था चाय तक नहीं पूछी उसने। यह पीड़ा व्यक्त करते हुए आपको अनेकों लोग मिल जाएंगे। चाय नहीं पिलाने पर आगंतुक का नाराज होना स्वभाविक है। प्रेमिका के मुख से यह सुन- मम्मी ने तुम्हें चाय पर बुलाया है प्रेमी फुदकने लगते हैं। मम्मी कॉफी पर नहीं बुलाती कभी। सारा भार बेचारी चाय पर ही है। चाय ने कितनी चतुराई से अमृत शब्द झटक लिया। कहीं लिखा देखा आपने- अमृततुल्य समोसा, अमृततुल्य डोसा। यह अमृततुल्य हो ही नहीं सकते। 80% आबादी को सुबह की चाय नहीं मिलने पर सर में दर्द हो जाता है। देश चाय का ऋणी है। चाय के उपकार भुलाए नहीं जा सकते। चाय के बिना कुछ सरकारी कर्मचारियों के टिके रहने की संभावना ही नहीं ? हर 2 घंटे में चाय रूपी अमृत का पान जरूरी है वरना साँस अटक सकती है। हमारे पी एम साहब भी चाय के मुरीद हैं। चाय बेचने वालों में पी एम मेटेरियल है और पीने वालों में भारतीय होने के गुण। आपके जीवन में भी चाय का स्वाद बना रहे। चाय विविधता में भी एकता की परिचायक है।
