श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर, सर्वाकार महंत रामसुंदर दास खसरा नंबर 1316, रकबा 00.644 भूमि के अवैध कब्जा से मुक्त कराना कलेक्टर रायपुर की जिम्मेदारी हैं
रायपुर { वफादार साथी }| विष्णु देव साय, ओ पी चौधरी, विजय शर्मा सहित सभी विधायक, सांसद , कलेक्टर रायपुर एवं पुलिस अधीक्षक रायपुर देखिए क्य
ा लिखा स्वयं समझे मामला करोड़ रुपए के शासकीय भूमि एवं श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर का हैं जिस सीमांकन होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ की शासकीय भूमि एवं मन्दिर की भूमि पर कुछ लोग कब्जा कर लिए हैं जैसे कि श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर, जिसके सर्वाकार महंत रामसुंदर दास हैं, इसका बाजार कीमत लगभग 28 करोड़ का है जिसका खसरा नंबर 1316, रकबा 00.644 राजस्व निरीक्षक मण्डल 12, मोहल्ला कुशालपुर की जमीन पर तेजी से कब्जा हो रहा हैं,00. 644 ×2.471 =1.591324×44,000×4,000 = 28,00,73,024 रुपए लगभग मतलब 28 करोड़ रुपए की श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर पर कब्जा हो रहा हैं अभी कुछ जमीन बची हैं कुछ जमीन पर कब्जा होकर लाइट कनेक्शन और हुकिंग से मतलब लाइट चोरी हो रहा हैं। मंदिर की भूमि का प्रशासनिक मालिक कलेक्टर रायपुर होता हैं इस कारण कलेक्टर रायपुर की ज़िम्मेदारी बनती है कि श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर, सर्वाकार महंत रामसुंदर दास हैं खसरा नंबर 1316, रकबा 00.644 भूमि पर जिन लोगों ने कब्जा किया है उसे कब्जा मुक्त करे।
भारत में मंदिरों का प्रशासनिक नियंत्रण, विशेष रूप से कलेक्टर की भूमिका, विभिन्न राज्यों में लागू विशिष्ट कानूनों और नियमों के आधार पर निर्धारित होती है। सामान्य तौर पर, कलेक्टर (जिलाधिकारी) को मंदिरों के प्रशासनिक प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियमों (Religious and Charitable Endowments Acts) या समान कानूनों के तहत दी जाती है। ये कानून मंदिरों की संपत्ति, प्रबंधन और संचालन को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।
मद्रास हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1951 (जो अब तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में लागू है): इस अधिनियम के तहत, राज्य सरकार मंदिरों के प्रशासन को नियंत्रित करने के लिए आयुक्तों और अन्य अधिकारियों को नियुक्त करती है। कलेक्टर को जिला स्तर पर मंदिरों की संपत्ति और प्रबंधन की देखरेख का दायित्व सौंपा जा सकता है।
बिहार हिंदू धार्मिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950: बिहार में मंदिरों, मठों और ट्रस्टों का रजिस्ट्रेशन और उनकी संपत्ति का प्रबंधन अनिवार्य है। इस अधिनियम के तहत जिलाधिकारी (कलेक्टर) को मंदिरों की संपत्ति का ब्योरा संग्रह करने और प्रबंधन में सहायता करने का निर्देश दिया जाता है।
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956: कुछ मामलों में, मंदिरों की जमीन और संपत्ति के प्रबंधन में कलेक्टर की भूमिका इस अधिनियम के तहत हो सकती है, विशेष रूप से जब संपत्ति का पुनर्वितरण या रजिस्ट्रेशन शामिल हो।
अन्य राज्य-विशिष्ट कानून: कई राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल आदि में समान कानून हैं, जिनके तहत कलेक्टर को मंदिरों के प्रशासन में निगरानी या प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाती है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में बड़े मंदिरों का प्रबंधन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधीन होता है, और कलेक्टर इस विभाग के साथ समन्वय करता है।
कलेक्टर की भूमिका:
कलेक्टर को मंदिरों की संपत्ति के रजिस्ट्रेशन, रखरखाव और मरम्मत के लिए जिम्मेदारी दी जा सकती है।
वे मंदिरों की आय, दान और संपत्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी करते हैं।
श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर, सर्वाकार महंत रामसुंदर दास खसरा नंबर 1316, रकबा 00.644 भूमि के अवैध कब्जा से मुक्त कराना कलेक्टर रायपुर की जिम्मेदारी हैं अगर कलेक्टर रायपुर अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करेंगे तो सनातनियों को रोड़ में उतरना होगा।
लेखक - अनिल अग्रवाल,रायपुर, छत्तीसगढ़
