रायपुर { वफादार साथी }| वन विभाग के अधिकारियों के अचल संपत्ति का ब्यौरा को सार्वजनिक करने का प्रावधान है जिस पर कुछ वन अधिकारियों ने अपना कुछ ब्यौरा सार्वजनिक किया है जिसमे से मर्सी बेला एवं दिलराज प्रभाकर हैं, वैसे तो अचल संपत्ति का ब्यौरा को सार्वजनिक नहीं करने के पीछे कई राज हैं जिस आप भी समझते है और हम भी...
आर टी आई का आवेदन खारिज करने का रिकॉर्ड बनाने वालों
D F O - स्टाइलों मंडावी
मयंक अग्रवाल
निखिल अग्रवाल
नीरज
धम्मशील
कुमार निशांत
दीपक कपिल
आयुष जैन
अगर इनके कार्यालय के सूचना के अधिकार अधिनियम की पंजी को देखेंगे तो मिलेगा कि 90 प्रतिशत आवेदन उपरोक्त अधिकारी कोई ना कोई गलत ग्राउंड बता कर ख़ारिज कर जानकारी नहीं दिए हैं।
एक - एक वन अधिकारी के चैंबर में 5 से 10 लाख रुपए का खर्चा किया गया है स्वयं कुछ अरण्य भवन के पिंजरे में बंद शेर के कक्ष का खर्चा 10 लाख रुपए तक है और कई लक्जरी गाड़ी से पेट्रोल फूंक रहे हैं, जबकि वनों की हालत ऐसा है कि दिन प्रति दिन पर्यावरण बिगड़ रहा हैं और जनता के खून पसीने की कमाई से वन अधिकारी अपना चैंबर पर व्यय कर रहे हैं, रायपुर वन मंडलाधिकारी लोकनाथ पटेल ने किसको बंगला और गाड़ी आबंटन राजा तालाब में दिया है उसका जानकारी भी सार्वजनिक जल्द ही करेंगे।
विद्वान सूचना आयुक्त श्री आलोक चंद्रवंशी जी ने जनता के हित में जो निर्णय दिया है उसे प्रदर्शित किया गया है, सभी वन अधिकारियों को C/2231/2023 के कड़िका 11 को सभी पी सी सी एफ, सी सी एफ, डी एफ ओ, एस डी ओ, रेंजर को पढ़ना चाहिए।
इतना ही नहीं भारतीय न्याय संहिता की धारा 198,201
धारा 198 BNS (पहले IPC की धारा 177 में था) को भी सभी पी सी सी एफ, सी सी एफ, डी एफ ओ, एस डी ओ, रेंजर को पढ़ना चाहिए।
अपराध: किसी सार्वजनिक सेवक को विधि द्वारा सक्षम प्राधिकारी द्वारा मांगी गई सूचना जानबूझकर गलत देना।
सजा:
कारावास: 6 माह तक (साधारण या कठिन)
जुर्माना: 5,000 रुपये तक
या दोनों
प्रकृति: गैर-संज्ञेय (Non-cognizable), जमानतीय (Bailable), किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय।
धारा 201 BNS (पहले IPC की धारा 181 में था)
अपराध: किसी सार्वजनिक सेवक को शपथ या विधि द्वारा बंधित होने पर झूठी सूचना देना, यह जानते हुए या विश्वास करते हुए कि वह सूचना असत्य है, ताकि उसका उपयोग किसी कानूनी कार्यवाही में सबूत के रूप में किया जाए।
सजा:
कारावास: 2 वर्ष तक (साधारण या कठिन)
जुर्माना
या दोनों
प्रकृति: गैर-संज्ञेय, जमानतीय, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय।
संक्षेप में तुलना (पुरानी IPC vs नई BNS):
अपराध का प्रकार
पुरानी IPC धारा
नई BNS धारा
अधिकतम सजा (BNS में)
सार्वजनिक सेवक को गलत सूचना देना
धारा 177
धारा 198
6 माह + 5,000 जुर्माना
शपथ पर झूठा बयान/सबूत देना
धारा 181
धारा 201
2 वर्ष + जुर्माना
नोट: भारतीय न्याय संहिता में जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है और कुछ अपराधों की भाषा को सरल एवं स्पष्ट बनाया गया है, लेकिन मूल अपराध और सजा में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
लेखक - अनिल कुमार अग्रवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़
