रायपुर { वफादार साथी }| छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) अगर अपनी सभी कार्यालयीन प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी रखता है, तो उसके बहुत सारे ठोस और दीर्घकालिक फायदे होते हैं।
मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:
भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार लगभग खत्म हो जाता है
रिश्वत, सिफार
िश, नेपोटिज्म (रिश्तेदारी) और फर्जी प्रमाण-पत्रों का खेल बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि हर स्टेप दिख रहा होता है।
मेरिट की सच्ची जीत होती है
योग्यतम अभ्यर्थी का चयन होता है, न कि पैसे या पहुंच वाले का। इससे सरकारी विभागों में बेहतर अफसर और कर्मचारी आते हैं।
अभ्यर्थियों का विश्वास बढ़ता बढ़ती है
लाखों युवा जो सालों मेहनत करते हैं, उन्हें लगता है कि “सिस्टम फेयर है”, इसलिए वे और मन लगाकर तैयारी करते हैं। CGPSC पर भरोसा बढ़ता है।
कोर्ट केस और विवाद बहुत कम हो जाते हैं
आज ज्यादातर केस इसलिए होते हैं क्योंकि “प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी”। RTI, कोर्ट में बार-बार जवाब देना पड़ता है। पारदर्शिता से 70-80% याचिकाएं अपने आप कम हो जाती हैं।
आयोग की छवि और प्रतिष्ठा घटी है।
CGPSC को “देश के सबसे पारदर्शी PSC में से एक” माना नहीं जाता है , भूपेश बघेल ने इसे बर्बाद कर दिया है (जैसे अभी कर्नाटक, राजस्थान कुछ हद तक कर रहे हैं)। इससे अच्छे कैंडिडेट छत्तीसगढ़ में ही रहकर तैयारी करने के बाद भी उनका सलेक्शन नहीं होता हैं।
जवाबदेही तय होती है।
अगर कोई गड़बड़ी होती भी है तो तुरंत पकड़ में आ जाती है और जिम्मेदार अधिकारी को सजा मिल सकती है। इससे आयोग के अंदर भी डर बना रहता है।
तकनीकी रूप से आसान और सस्ता हो जाता है
आजकल ऑनलाइन आवेदन, OMR की स्कैन कॉपी अपलोड, आंसर-की तुरंत जारी, इंटरव्यू के अंक तुरंत वेबसाइट पर – ये सब करना बहुत आसान और कम खर्चीला है।
मीडिया और जनता का दबाव कम होता है
जब सब कुछ खुला होता है तो “CGPSC में घोटाला” जैसे आरोप लगाना मुश्किल हो जाता है।
वास्तविक उदाहरण:
कर्नाटक PSC ने 2021 से OMR शीट, इंटरव्यू मार्क्स सब अपलोड करना शुरू किया → कोर्ट केस 80% कम हुए।
राजस्थान PSC ने हर चरण के बाद वीडियो और डॉक्यूमेंट अपलोड करना शुरू किया → अभ्यर्थियों का भरोसा बहुत बढ़ा।
पदोन्नति, भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता से केवल अभ्यर्थी ही नहीं, पूरा छत्तीसगढ़ राज्य जीतता है क्योंकि बेहतर प्रशासनिक अधिकारी मिलते हैं और युवाओं का भरोसा सरकार पर बना रहता है।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में भ्रष्टाचार के मामले मुख्य रूप से हाल के वर्षों में सामने आए हैं, खासकर 2020-2021 की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े एक बड़े घोटाले के रूप में। विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज की गई जानकारी के आधार पर, यह एक सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म), पेपर लीक, रिश्वतखोरी और मेरिट लिस्ट में हेराफेरी शामिल है। पूर्व में (यानी 2020 से पहले) बड़े पैमाने पर कोई प्रमुख भ्रष्टाचार का मामला दर्ज नहीं मिला, लेकिन हालिया जांचों से पता चलता है कि यह समस्या वर्षों से चली आ रही हो सकती है।
1. मुख्य घोटाला: 2020-2021 CGPSC भर्ती घोटाला
यह CGPSC का सबसे बड़ा और चर्चित भ्रष्टाचार कांड है, जिसमें कम से कम 5 अलग-अलग मामले आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जुलाई 2024 में एक FIR दर्ज की, जो इस घोटाले का हिस्सा है। कुल मिलाकर, यह एक ही सिस्टम का हिस्सा लगता है, लेकिन कई FIRs के रूप में बंटा हुआ है।
प्रकृति (Nature of Corruption):
भाई-भतीजावाद: CGPSC अधिकारियों, राजनेताओं और उनके रिश्तेदारों के बच्चों/रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP, जिला आबकारी अधिकारी आदि पदों पर अनुचित तरीके से नियुक्ति। उदाहरण: कुल 171 नियुक्तियों में से कई में रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी गई, जैसे कि उपनाम बदलकर संबंध छिपाना।
पेपर लीक: पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने भतीजों (नितेश और साहिल) को प्रीलिम्स और मेन्स के प्रश्नपत्र लीक किए। अन्य मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ और विशेष कोचिंग दी गई।
रिश्वतखोरी: चेयरमैन को 45 लाख रुपये की रिश्वत मिली, जिसमें एक बिजनेसमैन शामिल था।
अन्य: इंटरव्यू पैनल में पूर्वाग्रह (चेयरमैन ने 22 पदों के इंटरव्यू में भाग लिया, जो नियमों के खिलाफ था), कॉलेज प्रोफेसरों की अवैध नियुक्ति। IPC की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7A, 12 के तहत आरोप।
कुंजी आरोपी (Key Accused):
टामन सिंह सोनवानी: पूर्व चेयरमैन (IAS अधिकारी), मुख्य आरोपी। उनके रिश्तेदार:
नितेश सोनवानी (डिप्टी कलेक्टर),
साहिल (DSP),
निशा खोसले (डिप्टी कलेक्टर), आदि।
जीवन किशोर ध्रुव: पूर्व सचिव।
उनके बेटे सुमित ध्रुव (डिप्टी कलेक्टर)।
आरती वासनिक: पूर्व परीक्षा नियंत्रक।
अन्य: रिटायर्ड IAS अधिकारी और उनके बेटे (सितंबर 2025 में गिरफ्तार), कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला, सुधीर कटियार के रिश्तेदार (जैसे भुमिका कटियार, शशांक गोइल), गवर्नर के सचिव अमृत खलखो के बच्चे (नेहा और निखिल खलखो), आदि। कुल 16+ गिरफ्तारियां, जिसमें 5 हालिया (सितंबर 2025)।
समयरेखा (Timeline):
2020-2021: परीक्षाएं आयोजित, मेरिट लिस्ट में हेराफेरी।
मई 2023: परिणाम घोषित, विरोध शुरू।
जून 2023: घोटाला उजागर, हाईकोर्ट ने संदिग्ध उम्मीदवारों को सेवा में शामिल होने से रोका। CGPSC ने उत्तर पुस्तिकाएं नष्ट करने का टेंडर जारी किया (बाद में वापस लिया)।
फरवरी 2024: राज्य सरकार ने EOW को सौंपा, CBI को ट्रांसफर।
जुलाई 2024: CBI ने FIR दर्ज की, छापेमारी (15+ जगहों पर)।
नवंबर 2024: सोनवानी और बिजनेसमैन गिरफ्तार (रिश्वत मामले में)।
जनवरी 2025: CBI ने पहली चार्जशीट दाखिल, पेपर लीक का खुलासा।
अप्रैल 2025: CBI छापे, सोनवानी की जमानत खारिज।
सितंबर 2025: 5 और गिरफ्तारियां (रिटायर्ड IAS सहित)।
यह घोटाला पूर्व कांग्रेस सरकार (भूपेश बघेल के कार्यकाल) से जुड़ा माना जाता है, जहां अधिकारियों को संरक्षण मिला।
2. पूर्व के अन्य संभावित मामले (Pre-2020)
खोज से कोई बड़ा पेपर लीक या भ्रष्टाचार कांड (जैसे 2013 या 2015) स्पष्ट रूप से नहीं मिला। हालांकि, कुछ पुराने विवाद हैं।
2007 भर्ती: एक मामले में भ्रष्टाचार का आरोप नहीं साबित हुआ, लेकिन रिक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठे।
सोनवानी का पुराना इतिहास: टामन सिंह सोनवानी पर 2000 के दशक में 200 करोड़ की जमीन घोटाले और MGNREGA फर्जी नामांकन स्कैम के आरोप लगे, जो CGPSC से पहले के हैं। यह दर्शाता है कि सिस्टम में पुरानी खामियां हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, पूर्व में 1-2 छोटे विवाद ही दर्ज हैं, लेकिन कोई बड़ा स्कैंडल नहीं। हालिया जांचों से संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार दशकों से चला आ रहा हो सकता है, लेकिन दस्तावेजी प्रमाण मुख्य रूप से 2020+ के हैं।
प्रभाव और वर्तमान स्थिति
प्रभाव: हजारों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित, मेरिट सिस्टम पर सवाल। हाईकोर्ट ने कई नियुक्तियां रोकीं।
वर्तमान: CBI जांच जारी, कई आरोपी न्यायिक हिरासत में। नई सरकार ने सुधारों की घोषणा की, जैसे पारदर्शी भर्ती।
यह मामला छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में गहरी जड़ें दर्शाता है, जहां राजनीतिक हस्तक्षेप प्रमुख रहा।
मेरे कई मामले पर RTI के आवेदन CGPSC में लगे हैं क्या आलोक चंद्रवंशी भ्रष्टाचारी टामन सिंह सोनवानी को बचाने में लगे हैं ये तो समय बताएगा???? मगर कोई भी निर्णय देने के पहले
आलोक चंद्रवंशी को B N S की धारा 198, 201 को पढ़ लेना चाहिए, B N S की धारा 198, 201 आलोक चंद्रवंशी पर भी लागू होता हैं।
इन सब समस्याओं से बचना है तो आर टी आई कार्यकर्ता को तन मन धन से सहयोग देना चाहिए, आर टी आई कार्यकर्ता को सहयोग देने से होने वाले फायदे
आरटीआई (Right to Information) कार्यकर्ताओं को आर्थिक सहयोग देना न केवल एक नेक काम है, बल्कि समाज, लोकतंत्र और पारदर्शिता के लिए बहुत बड़ा निवेश है। इसके प्रमुख फायदे निम्नलिखित हैं:
1. भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है
ज्यादातर बड़े घोटाले (जैसे CGPSC घोटाला, PDS घोटाला, 2G, कोयला घोटाला, आदर्श सोसाइटी आदि) सबसे पहले RTI कार्यकर्ताओं ने ही उजागर किए।
आपका एक छोटा-सा सहयोग उन्हें लगातार RTI दाखिल करने, अपील करने और कोर्ट तक जाने की ताकत देता है।
2. आपके अपने पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होता है
सरकारी योजनाओं (PM आवास, मनरेगा, स्कॉलरशिप, पेंशन, राशन आदि) में आपका टैक्स का पैसा जाता है।
RTI कार्यकर्ता इन्हीं योजनाओं में फर्जीवाड़ा पकड़ते हैं → आपका पैसा सही हकदार तक पहुँचता है।
3. लोकतंत्र मजबूत होता है
RTI भारत का चौथा स्तंभ है। जब RTI कार्यकर्ता मजबूत होंगे, तो सरकार जवाबदेह बनेगी।
बिना RTI के नेता-अफसर मनमानी करेंगे।
4. आपके क्षेत्र में सीधा फायदा
कई RTI कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर काम करते हैं:
गाँव में फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड बंद करवाना
स्कूल में शिक्षक-अनुपस्थिति पकड़ना
अस्पताल में दवाई-उपकरण की कमी उजागर करना
सड़क-नाली-पानी की खराब टेंडर पकड़ना → आपका 500-1000 रुपया देने से आपके ही मोहल्ले/गाँव में सुधार होता है।
5. RTI कार्यकर्ताओं की जान बचती है
2005 से अब तक 100+ RTI कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है (गुजरात, UP, महाराष्ट्र, बिहार में सबसे )।
आर्थिक मदद से वे वकील रख सकते हैं, सुरक्षा ले सकते हैं, परिवार चला सकते हैं।
6. लंबे समय तक प्रभाव
1000 रुपये एक बार खर्च करने से एक RTI कार्यकर्ता 50-100 RTI दाखिल कर सकता है, जिससे लाखों-करोड़ों का भ्रष्टाचार बचता है।
यह "एक रुपये से लाखों बचाने" वाली बात है।
मैं जो आर टी आई के आवेदन लगाए हैं उसके दस्तावेज को सार्वजनिक कर रहा हूं।
अत: सभी से आग्रह है कि हमारे अभियान में तन- मन- धन से सहयोग करे मेरा {अनिल कुमार अग्रवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़} फोन पे नंबर 9425520385 है ।
